Vijay Jha's

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मौसम का इंतज़ार


 सुनो,  मैंने सोचा था कि तुम इन सर्दियों में अगर यहां आ पाओ  तो तुम्हे अपने अपार्टमेंट वाले बगीचे के नारंगी के पेड़ दिखा के इम्प्रेस करूँगा। पतझड़ के मौसम आने वाले है, संतरे सड़ के ज़मीन पे बिखर जा रहे हैं और कुछ दिनों में पेड़ों से पत्ते झड़ के उन्हें ugly   nude कर देंगे। सिर्फ लडकियां और बच्चे खूबसुरत लगते हैं उन महीनों में। पर ये लोग कुछ खास बुरा नहीं मानते, इंन्तेज़ार करते हैं गर्मियों का। और बातें करते हैं। तुम्हारे सपनों के जैसे प्यारे नहीं हैं ये देवदूतों की तरह। इन्होंने हथियार पहले बनाया और बड़ी लड़ाईयां की थी अपनो के बीच। लेकिन फिर समझ गए कि अपनों से लड़ते नहीं, वक़्त लगा था....... पर समझ गए। अब ये नफरत नहीं करते एक दूसरे से, बस विश्वयुद्ध फिर से ना हो जाये उसके डर से इग्नोर कर देते हैं एक दूसरे की गलतियों को। एक दिन हम भी दुनिया का सबसे अच्छा बारूद बनाएंगे और फिर ढेर सारी लड़ाईयों के बाद हम भी किसी से नफ़रत नहीं करेंगे। अभी अच्छे मौसम का इंतज़ार करना please.
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