Vijay Jha's

Portfolio

ख़ामोशी और बयान ए लम्हा


वो जो ख़ामोशी थी
हर एक कोरे पन्ने पे एक सी लिखी
जो मैं ओढू- की तुम ओढ़ो
अदा और  हुनर एक सा  था
ये  जो बयान ए लम्हा है
हर पन्ने पे नयी सी रंगरेजी है
जो तुम पहनो तो सलीका अलग
जो मै पहनू तो तरीका अलग
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