Vijay Jha's

Portfolio

दिन

पापा के पुराने किताबों के पीले बीमार और अनमोल पन्नों के बीच रखे सूखे फूल की तरह दिन गुजरते हैं

यूँ लगता हैं उन फूलों ने वेदस्वर और काव्य सूक्तियों की जगह पन्नों पे वक़्त लिख दिया हो, इतिहास के आदिमानव की गुफाओ की चित्रकथाओं की तरह,बेढंग और अनमोल,
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