My Story
Gallery
Archive
Blog
About
Contact
Imbuer
Vijay Jha's
Portfolio
दिन
vijay
पापा
के
पुराने
किताबों
के
पीले
बीमार
और
अनमोल
पन्नों
के
बीच
रखे
सूखे
फूल
की
तरह
दिन
गुजरते
हैं
यूँ
लगता
हैं
उन
फूलों
ने
वेदस्वर
और
काव्य
सूक्तियों
की
जगह
पन्नों
पे
वक़्त
लिख
दिया
हो
,
इतिहास
के
आदिमानव
की
गुफाओ
की
चित्रकथाओं
की
तरह
,
बेढंग
और
अनमोल
,
Next Post
Newer Post
Previous Post
Older Post
Home
Popular Posts
(no title)
बरसात कहीं भी रहो , बरसात आती है तो कुछ अंदर तक भींगता है , वो सब भी महसूस होता है जिसके होने का अहसास कई महीनो सालों से हुआ नहीं था...
Contact Us
Name
Email
*
Message
*
Popular Posts
(no title)
बरसात कहीं भी रहो , बरसात आती है तो कुछ अंदर तक भींगता है , वो सब भी महसूस होता है जिसके होने का अहसास कई महीनो सालों से हुआ नहीं था...
Navigation
About Me
vijay
View my complete profile
Like us
Blog Archive
►
2018
(1)
►
February
(1)
▼
2016
(23)
►
November
(1)
►
October
(3)
►
August
(1)
▼
July
(18)
Railway platforms
rolling in the deep
सबसे बड़ा वाला चाँद
पापा बताये हैं
पांच साल वाला व्यस्क
कहानियाँ
मौसम का इंतज़ार
दिन
पुराने लोग नए पन्ने
#DoomedToRepeat
Human Weakness
अंतराक्षरी
ख़ामोशी और बयान ए लम्हा
लोग
कल्पकथाओं के नायक
बरसात
ज़ीरा सूर्य
►
2014
(1)
►
March
(1)
About me
Sponsor
Instagram