Vijay Jha's

Portfolio
Ma, I can't recall when did I start writing. was it when you broke your promise of buying new shoes on Durga Puja? I felt so hurt. it must have been then when I wrote my first poem.

Or was it when that girl in Fishtail Skirt from Kanya Vidyalaya smiled at me on the eve of Saraswati Puja? she smelled so consumable. there was indie pop music in the air & it was spring.I felt like the hero in the video. it must have been then when I wrote my first poem.

A friend once told me - you must have elements of truth to create anything.
with all the elements of truth, I wanted to offer a love poem to an eight-month-old baby girl & I thought there is time, for her to grow like smiling Hindu goddess.

I wish I could know while I was gathering elements of truth, my planned love poem became eulogy, by the act of one manless-man.
I wish I could conceive that eight-months-old baby in my belly till she grows like Hindu goddess with swords & lions. 
विषम अवस्था में बेशर्म हिम्मत के साथ दिल करता है -  एक बार समय को उस डोर से थाम लूँ जिसके जुलाहे से गुलज़ार साहब जलते हैं,
एक कमरा तैयार कर तुम को दिखा दूँ, निराला की पत्थर तोड़ती औरत इलाहाबाद के धुप में कैसे रेणु की बेग़म बन सकती है,
दिनकर की मर्जी से चलने वाला रश्मिरथी पाश ही है।  खलिस्तानि गोली खा के पता करे - खतरनाक क्या होता है....
तुम बस की ग़ालिब की तरह मजाकिये रहना..
 बुल्ले शाह वाली पहचान रखना..
तुलसी दास की तरह पागल हो जाना ~अगर मेरा राम होता, उसका चरित्र क्या होगा,
अगर सब बेस्वाद लगे तो तुम समय के लिए तुम बदसूरत महादेवी वर्मा बन के इंतज़ार करना ~ मधुर मधुर मेरे दीपक जल,

हम एक साथ मिल कर दुष्यंत ना बने पर कोशिश कर लेंगे ~इस नदी की धार में ठंडी हवा आती तो है,
नाव जर्जर ही सही लहरो से  टकराती तो है,एक चिंगारी कहीं से ढूंढ लाओ दोस्तों.

अगर कोई बात खारिज करनी हो तो तुम बटालवी बन जाना ~ माई नि माई, मैं इक शिकरा यार बनाया।
और मैं अमृता प्रीतम की बातें चोरी कर हौले कह दूंगा ~ मैं तैनू फिर मिलांगा, कदो पता नी, किथे पता नी
कभी छुआ होगा मुझे
छाप यूँ लगी है
जैसे हज़ारों साल पहले 
लिखी पत्थरों पे श्लोक होतें है।

कहीं छुआ होगा मुझे
जैसे बाथरूम से नन्हा सा बच्चा 
अपने पांवों के निशाँ छोड़ता
 माँ वाले कमरे की तरफ दौड़ लगाए।

कहीं छुआ है मुझे
जैसे दादी अपने भन्सा घर में 
लकड़ी की आंच के और अपने प्यारे पांवों को 
छठ के खीर पत्तल के बीच रखती है। 

जहां भगवान् नहीं होता
 उनके पाँव के छाप होते हैं।

और असर यूँ किया है
कि अकेला दुनियां की तन्हाई वाला ज़हर
एक सांस में भर के
माफ़ी के साथ
हौले छोड़ देता हूँ

आसमान के उस टुकड़े के लिए
जो अभी इस दुनिया की है
और कल हमारी होगी!
द चार्मर्

राजस्थान की रंग बिरंगी गलियों में पगड़ी पहने गाने वाला वो चार्मर जो कबीर प्रोजेक्ट पे अपने टूटे दांत और शीशे जड़ी सारंगी के साथ पुकारता था अकेला ...
"चक्की चल रही,कबीरा बैठा रोइ
दुइ पाटन के बीच, साबुत बचा ना कोई" 

कोई कबीर नहीं........, कोई कबीर का मुरीद नहीं। 
कबीर वहम होगा उसका?

फिर एक बार भटक के शराबखाने आ गया, आदत से मज़बूर एक और अलख लगाई....

"कबीरा जब पैदा हुआ तो जग हंसा हम रोये......"

फिर सब कबीर, सब कबीर के मुरीद और ये दुनिया एक वहम

ये कबीर पीचर और पेग्स के साथ ही सर्व होता है क्या!!
there were guys who used to bring festivals before winter every year. some with colorful balloons and girly stuff hanging from bamboo or shop on wheel.   parents were forced to give pocket money so that we could buy our share of festival - i guess they did not want to create bad impression in front of the gods.
"जय माता दी " was tuned in all imaginable combinations with support from bollywood.  classified actions of teenage girls and denim wearing guys on hero ranger were overlooked during  सांझ के दीप. and tobacco chewing guy earned some respect by fasting.   i guess they all boasted- godess has come to forgive all for 10 days.

#दुर्गा_पूजा_समिति  #पंडाल_में_आएं   #रोजाना_४_शो_दुर्गा_पूजा_के_शुभ_अवसर_पे #चंदा_देना_होगा
Do you work for living
Or you live to pay
For the electricity bill
And the coffee and the girl.....

Are you in the limbo
With same traffic lights
Every one is running
And no one overrides...

Does the TV wash you over
And the beer seems foul
Zombies making a joke
But you smile...

Do you miss that tree
a school kid planted
Has grown so different
And you feel outsmarted...
railway platforms are so emotion filled always..  Happy .. excited.. sad.. weepy .. alone and boring too .. like humans. infact they smell like human and human made odor. in my country all railway platforms are so  very alive so  very much in twenties....
 not like airports... unborn.. undead.. odorless.. infact the smell of food is strange... ..
full with zombies walking in suit pretending to look like calender pics outside 
विज्ञान के विद्यार्थी बन्ने का प्लानिंग किए थे नौकरी आ पीयर प्रेशर के फेरा में। फन्नी तो ये हुआ कि वैज्ञानिक लोग के साथ बियर के बीच में इम्प्रैशन बनाने के चक्कर में ग़ालिब, गुलज़ार, रेणु और इतिहास पढ़ के बक्कड़ करने लगे। अब फेसबुकिया कविता आ इतिहास, दोनोँ दस्त पे दस्त करवा रहा है। 
खैर एक और फन्नी हुआ - H1 L1 टाइप अमरीकी भौतिकवाद वाले कॉस्मो इंडिया में वो गिरमिटिया भारत वाली सोच जो गर्भनिरोधक गोली के प्रचार को गिल्टी फीलिंग से देखता था ब्लैक एंड वाइट TV पे, उसी को सबसे ज्यादा फील होता है ये वाला गीत - rolling in the deep
वो वाला चाँद..
जो पूरा चाँद था
सबसे बड़ा वाला

झील में यूँ झाँका करता था
जैसे उसकी बॉल चली गयी हो...
और झांकते झांकते
झील में गिर जाता था।

उसे कोई एक फूंक मार कर बचाने को कितनी बार जी चाहा होगा,

बस्ते में उसको अपने चुराए चॉकलेट से भी ज्यादा दिनों तक संभाल कर रखता,
चाँद में चीटियाँ लगती होंगी क्या?

फिर माँ दीवाली की सफाई में उसको हड़प कर हमें छूने नहीं देती,

सजा कर गेस्टरूम के पुराने बेमेल पायों वाले टेबल पे रख देती।

और फिर हमारे घर में ही रहता...
वो वाला चाँद,
जो पूरा चाँद था

सबसे बड़ा वाला
चटाई बिछा कर किरासन तेल वाली लालटेन पर उमस वाली गर्मी में पढ़ी गयी सातवीं कक्षा के भूगोल के किताब वाले एल्प्स पर्वत के साथ की गयी दोस्ती कभी तनहा नहीं गुजरी, गर्म शीशे को फूंक कर अजीब सी शक्ल वाले गुलदस्ते बेचने वाली
बंजारन के कान के झुमकों की तरह  एक ही आव्रिति में डोलते बच्चों में कितनी बार बहस हुई थी - "जानता है जी, एल्प्स पे हमेशा बर्फ रहता है
"अच्छा तुम तीसरा अध्याय भी पढ़ लिया? "
"हाँ लेकिन हिमालय सबसे ऊँचा है,वहाँ शंकर जी रहते हैं"
"हाँ हमको मेरे पापा बताये हैं"

यूँ एल्प्स पे पिघलती बर्फ की ठंडक की साथ सर्द हवा सोमवार की प्रोडक्टिव लाइफ का दम घोंटा करती है, कि अब वो बच्चे स्कूल नहीं जाते, बंजारन भी गर्मियों के इन्तेजार में है। पापा को शक है की हिमालय भी एल्प्स की तरह ही होगा और शंकर जी ने रहने की जगह बदल ली होगी


जॉम्बीज घुमा करते हैं, सूट पहन कर मेट्रो और बसों में।
इंटरनेट पर कच्चे पक्के पन्नों के बीच किसी विदेशी लेखक के निबन्ध में पढ़ लिया - पांच साल की उम्र की बाद मनुष्य के स्वभाव में परिवर्तन सिर्फ बाहरी दुनिया के लिए होता है, अकेले में हम सब पांच साल के हैं। ऐसा लगा जैसे शर्म से बचा लिया उस लेखक ने,
पांच साल की उम्र वालीं गली के शिवालय वाले पंडित जी ने जब से कह दिया कि शिव जी का नैवेद्य उठाते नहीं, तब से तो जब दिल करता बताशे खाने का, शिवालय पंहुच जाता और चूहों से छीन कर जूठे बताशे स्कूल के बस्ते में भर लेता था।

यहां दफ्तर  के सालाना रूटीन चेकअप में डॉक्टर को आश्चर्य हुआ कि मैंने कोई वैक्सीनेशन नहीं लिया बचपन में, और मैंने उसे वो चूहों वाली बात नहीं बताई, ये भी नहीं बताया कि पांच साल की उम्र के बाद स्वभाव नहीं बदलता
कुछ कहानियाँ हम कब से लिखते रहे हैं इसका कोई हिसाब नहीं, कोई खबर नहीं, कोई इल्म तक नहीं। बर्फबारी की सफ़ेद रुई जैसी फाहों की तरह वक़्त इन्हें तारिख में तब्दील कर छुपाता चला गया। और अब उन्ही दास्तानों का ख्वाब देख हम कभी दिल जला लेते हैं तो कभी गला।

कितने ग़ालिब और मीर के शेर आवारा लड़खड़ाये होंगे, शीशे के ग्लासों की हमक़दमी के कोलाहल के दौरान। उन बिखरे शेरों को तलाश के संजोना चाहता हूँ जैसे दीवाली की अगली सुबह कोई चौखट से बुझे दिए उठा मिटी की चारदीवारी पर रखता हो अगली दीवाली को रोशन करने की ख्वाहिश में......

 सुनो,  मैंने सोचा था कि तुम इन सर्दियों में अगर यहां आ पाओ  तो तुम्हे अपने अपार्टमेंट वाले बगीचे के नारंगी के पेड़ दिखा के इम्प्रेस करूँगा। पतझड़ के मौसम आने वाले है, संतरे सड़ के ज़मीन पे बिखर जा रहे हैं और कुछ दिनों में पेड़ों से पत्ते झड़ के उन्हें ugly   nude कर देंगे। सिर्फ लडकियां और बच्चे खूबसुरत लगते हैं उन महीनों में। पर ये लोग कुछ खास बुरा नहीं मानते, इंन्तेज़ार करते हैं गर्मियों का। और बातें करते हैं। तुम्हारे सपनों के जैसे प्यारे नहीं हैं ये देवदूतों की तरह। इन्होंने हथियार पहले बनाया और बड़ी लड़ाईयां की थी अपनो के बीच। लेकिन फिर समझ गए कि अपनों से लड़ते नहीं, वक़्त लगा था....... पर समझ गए। अब ये नफरत नहीं करते एक दूसरे से, बस विश्वयुद्ध फिर से ना हो जाये उसके डर से इग्नोर कर देते हैं एक दूसरे की गलतियों को। एक दिन हम भी दुनिया का सबसे अच्छा बारूद बनाएंगे और फिर ढेर सारी लड़ाईयों के बाद हम भी किसी से नफ़रत नहीं करेंगे। अभी अच्छे मौसम का इंतज़ार करना please.
पापा के पुराने किताबों के पीले बीमार और अनमोल पन्नों के बीच रखे सूखे फूल की तरह दिन गुजरते हैं

यूँ लगता हैं उन फूलों ने वेदस्वर और काव्य सूक्तियों की जगह पन्नों पे वक़्त लिख दिया हो, इतिहास के आदिमानव की गुफाओ की चित्रकथाओं की तरह,बेढंग और अनमोल,

पुराने लोग नए पन्ने

खाली पड़े यूरोपियन पैमानों के बीच जगह धुंधली सी हैं जहां तुम्हारे साथ बियर के ठंडी ना होने की शिकायते जायके में अब भी ताज़ा सी लगती हैं। सिगरेट के बद्तमीज़ धुएं के साथ बिखरते इंटेरनेशनल पोलिटिक्स की खुदगर्जी  पर हुई हमारी रज़ामंदी के साथ... अरबी सही थे, हिटलर को ज़लालत भेजो।

फिर वही एक टेबल याद आता है जिसको हमने खुदा का हाज़िर नाज़िर मान कर कितने कंफेशंस किये थे कल को बेहतर दूनिया बनाने की वहशत में, अपनी औकात को तुम्हारे ड्रिंक की सिप में नापा करता था।
सुनो.. शैतान बनने निकला हूँ.. अपने घर के में  स्कूल फैंसी ड्रेस वाली तस्वीरों को छुपा के रखना यार.. डर लगता है कहीं गुजर ना जाऊं ,गर मुस्कुराते हुए  तस्वीरें  वो अटपटे सवाल ना पूछ दें जिनको ले कर हम एक दूसरे से आँखें चुराते हैं....

#EuroTrip  
#DoomedToRepeat
One day you and I have to agree on forgiving each other for our ignorance. That day we will talk alot. We will share a list of forgiveness and we will write the entire minutes of meeting of it. I forgive you taking south indian coffee over tea. you forgive me for breaking signals on the road, I forgive you for smoking in public, we forgive a random guy for playing loud music in bangalore. we check with him if he can forgive me for being bihari in Mumbai.
May be we will start requesting forgiveness of our choices. we will infact forgive each other for cruel emperors from history books for killing people. I will forgive you for king Ashoka killing so many people, and then you will forgive me for mugal emperors invading india. I will forgive you for Nehru caught smoking, drinking and having fun with pretty women, you will infact forgive me for Gandhi as well.
its been quite long forgiving each other -  terrorism, animal killing, beef eating, pork cooking, religion, atheism,Agnosticism, westernization, imigration,  honor killing,  history, politics,  it will be brave of us to forgive each other for every thing that made us desperate and radical.  
once we are exhausted forgiving each other, our score is even  we will not to let things grow that seek forgiveness anymore. then may be we will not let people being killed, girls being raped, human dignity being molested for unforgivable reasons in our country. 
  1. We are flock of sheep, in self hypnosis of lions. together we are gun shots to crack big time jokes, alone from the herd - we are the joke, the poor one - even a strange look cracks us 


दिन, महीने, साल और नए शहरों में खानाबदोशी में, वो जगह जो अपनी सी लगती है वहाँ अब भी घर के सामने बिखरे झील में चाँद लटकने को बेताब रहता है, हाथ की धुलाई से तैयार, नील डाला हुआ  सफ़ेद हाफ शर्ट पहन कर छत पे  खड़ा  पाता हूँ खुद को, मछरों का एक झुण्ड सर पे नाचता है और  अब भी अंतराक्षरी के बीच पुराने फ़िल्मी गीतों के मुखड़ो को दिल की दीवारों पे उकेरती है. किसी ऐसी एक शाम को  गीतों के बीच   कुछ सेकण्ड्स तक मुझे देखते हुए कहा था - “की बात छियै, आई बहुत स्मार्ट लाइग रहल छीहीन"अपने उस स्मार्टनेस को ढूंढता हूँ। नयी गलियों में, नए चेहरों में, और वो गीत भी बजते हैं कानों में - ये शाम मस्तानी … मदहोश किये  जाए। …  मुझे डोर कोई खींचे। . तेरी ओर लिए जाए…… 


वो जो ख़ामोशी थी
हर एक कोरे पन्ने पे एक सी लिखी
जो मैं ओढू- की तुम ओढ़ो
अदा और  हुनर एक सा  था
ये  जो बयान ए लम्हा है
हर पन्ने पे नयी सी रंगरेजी है
जो तुम पहनो तो सलीका अलग
जो मै पहनू तो तरीका अलग
लोग
साला वो लोग जबरदस्त होता है जो अपना ठाकुर परसाद चाहे बिश्व्कर्मा भगवान वाला कैलेंडर को बैकग्राउंड में रख के गुलबिया शर्ट वाला फोटो में 36 आदमी टैग कर के गुड मॉर्निंग गुड इवनिंग पोस्ट कर के खुश हो जाता है, एक्को म्यूच्यूअल फ्रेंड नहीं होगा, तहियो फ्रेंड रेक्वेंस्ट भेजगा।
लाइफ इज़ पेन त लाइफ इस दिस दैट वाला चचेरा ममेरा कज़िन डज़ीन सब भी फूल पत्ती तितली पोस्ट कर के शांत रहता होगा।
छठ के घाट पे पूरा टह टह फ्लोरिसेंट कलर का सूट पहन के, ललका लिपिस्टिक वाली लड़की, जिसके मोबाइल का रिंग टोन अभिओ कुमार शानू का एटीज़ वाला गाना सब है, ऊ सब भी पूरा दिल का सेप वाला फोटो के साथ लव कैसे ट्रू होगा उसका क्विज पोस्ट कर के ठंढा जाती है।
एक हम लोग हैं…. इसका नागासाकी। आई इस डी कॉल पे पुराना दोस्त से डिसकस करते हैं की जो पोस्ट था उसका पोलिटिकल मतलब क्या है,. कोनो खास ज़ात का वाट तो नहीं लगा दियें ना… कहीं साम्प्रदाइक हुए का.. पोस्ट करने से दुनिया बदल जाएगा। कहीं देश का नुक्सान तो नहीं कर दियें। उहो वीकेंड को
मने अंग्रेजी में पूरा बतियाते हैं हम लोग। जय हो प्रभु।
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