Vijay Jha's

Portfolio

Mixed

विषम अवस्था में बेशर्म हिम्मत के साथ दिल करता है -  एक बार समय को उस डोर से थाम लूँ जिसके जुलाहे से गुलज़ार साहब जलते हैं,
एक कमरा तैयार कर तुम को दिखा दूँ, निराला की पत्थर तोड़ती औरत इलाहाबाद के धुप में कैसे रेणु की बेग़म बन सकती है,
दिनकर की मर्जी से चलने वाला रश्मिरथी पाश ही है।  खलिस्तानि गोली खा के पता करे - खतरनाक क्या होता है....
तुम बस की ग़ालिब की तरह मजाकिये रहना..
 बुल्ले शाह वाली पहचान रखना..
तुलसी दास की तरह पागल हो जाना ~अगर मेरा राम होता, उसका चरित्र क्या होगा,
अगर सब बेस्वाद लगे तो तुम समय के लिए तुम बदसूरत महादेवी वर्मा बन के इंतज़ार करना ~ मधुर मधुर मेरे दीपक जल,

हम एक साथ मिल कर दुष्यंत ना बने पर कोशिश कर लेंगे ~इस नदी की धार में ठंडी हवा आती तो है,
नाव जर्जर ही सही लहरो से  टकराती तो है,एक चिंगारी कहीं से ढूंढ लाओ दोस्तों.

अगर कोई बात खारिज करनी हो तो तुम बटालवी बन जाना ~ माई नि माई, मैं इक शिकरा यार बनाया।
और मैं अमृता प्रीतम की बातें चोरी कर हौले कह दूंगा ~ मैं तैनू फिर मिलांगा, कदो पता नी, किथे पता नी
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