Vijay Jha's

Portfolio

The charmer

द चार्मर्

राजस्थान की रंग बिरंगी गलियों में पगड़ी पहने गाने वाला वो चार्मर जो कबीर प्रोजेक्ट पे अपने टूटे दांत और शीशे जड़ी सारंगी के साथ पुकारता था अकेला ...
"चक्की चल रही,कबीरा बैठा रोइ
दुइ पाटन के बीच, साबुत बचा ना कोई" 

कोई कबीर नहीं........, कोई कबीर का मुरीद नहीं। 
कबीर वहम होगा उसका?

फिर एक बार भटक के शराबखाने आ गया, आदत से मज़बूर एक और अलख लगाई....

"कबीरा जब पैदा हुआ तो जग हंसा हम रोये......"

फिर सब कबीर, सब कबीर के मुरीद और ये दुनिया एक वहम

ये कबीर पीचर और पेग्स के साथ ही सर्व होता है क्या!!
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